Wheat Crop: देश के किसान इन दिनों रबी सीजन की फसल, खासकर गेहूं की खेती में व्यस्त हैं। गेहूं की फसल किसानों के लिए मुनाफे की एक बड़ी उम्मीद होती है। लेकिन यह उम्मीद कई बार फसल में रोग लगने से धूमिल हो जाती है। गेहूं की खेती/Gehu ki Kheti में रोग लगना आम बात है, पर इससे बचाव करना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं गेहूं की फसल में लगने वाले प्रमुख रोग, उनके लक्षण और प्रभावी प्रबंधन के तरीके।
गेहूं की फसल में लगने वाले प्रमुख रोग और उनके समाधान
रोग का नाम | लक्षण | प्रबंधन के उपाय |
---|---|---|
भूरा रतुआ रोग | पत्तियों पर नारंगी-भूरे रंग के धब्बे, जो दोनों सतह पर दिखते हैं। रोग बढ़ने पर फसल कमजोर। | क्षेत्र में एक ही किस्म न लगाएं। प्रोपिकोनाजोल 25 ई.सी. का 0.1% घोल बनाकर छिड़काव करें। |
काला रतुआ रोग | तनों और पत्तियों पर काले धब्बे, जिससे दाने झिल्लीदार और छोटे बनते हैं। | खेतों की निगरानी करें। टेबुकोनाजोल 25 ई.सी. का छिड़काव। |
पीला रतुआ रोग | पत्तियों पर पीली धारियां, पाउडर जैसा पीला पदार्थ। | प्रतिरोधी किस्मों का चयन। समय-समय पर छिड़काव। |
दीमक | पौधों की जड़ों और बीजों को नुकसान, मिट्टी में कॉलोनी बनाकर रहना। | खेत में गोबर और नीम की खली डालें। क्लोरपाइरीफास 20% ई.सी. का छिड़काव। |
माहू | हरे रंग के छोटे कीट, जो रस चूसकर पत्तियों और बालियों को कमजोर करते हैं। | गहरी जुताई करें। क्यूनालफास 25% ई.सी. का छिड़काव करें। |
भूरा रतुआ रोग: फसल के लिए सबसे बड़ा खतरा
लक्षण: यह रोग फसल की निचली पत्तियों पर सबसे पहले हमला करता है। नारंगी और भूरे रंग के धब्बे पत्तियों की दोनों सतहों पर दिखाई देते हैं।
इलाज: एक ही किस्म को बड़े क्षेत्र में न लगाएं। प्रोपिकोनाजोल 25 ई.सी. का छिड़काव रोग के प्रकोप को रोकने में सहायक होता है।
काला रतुआ रोग: तनों से फसलों को कमजोर बनाता है
लक्षण: तनों पर काले धब्बे जो धीरे-धीरे पत्तियों तक फैल जाते हैं।
इलाज: समय पर खेतों की निगरानी और प्रोपिकोनाजोल 25 ई.सी. का छिड़काव करें।
पीला रतुआ रोग: उत्तरी क्षेत्रों में ज्यादा प्रभाव
लक्षण: यह रोग फसल को तेजी से प्रभावित करता है। पत्तियों पर पीली धारियां बनती हैं और पौधे कमजोर हो जाते हैं।
इलाज: पीला रतुआ प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें। खेत की निगरानी और समय पर दवा का छिड़काव जरूरी है।
दीमक: फसल के लिए अदृश्य खतरा
लक्षण: दीमक फसल की जड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह ज्यादातर बलुई मिट्टी में पाया जाता है।
इलाज: खेत में नीम की खली डालें। क्लोरपाइरीफास का छिड़काव करें।
माहू: छोटे कीट, बड़ा नुकसान
लक्षण: पत्तियों और बालियों का रस चूसकर फसल को कमजोर बनाते हैं। मधुश्राव के कारण फसल पर काले कवक लग जाते हैं।
इलाज: खेतों में गहरी जुताई करें। क्यूनालफास 25% ई.सी. का छिड़काव प्रभावी है।
फसल की सुरक्षा: किसान क्यों ध्यान दें?
- उपज में बढ़ोतरी: रोगमुक्त फसल से उत्पादन बेहतर होगा।
- लागत में कमी: समय पर उपाय करने से रोगों का प्रसार रुकेगा, जिससे बचत होगी।
- बाजार में प्रतिस्पर्धा: अच्छी गुणवत्ता की फसल बाजार में बेहतर कीमत दिलाती है।
गेहूं की खेती को रोगमुक्त रखने के टिप्स
- खेतों की नियमित निगरानी करें।
- प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें।
- फसल के आसपास की सफाई और फसल अवशेष नष्ट करें।
- समय-समय पर दवाओं का छिड़काव करें।
किसान भाई अगर गेहूं की खेती/Gehu ki Kheti में रोगों के लक्षण पहचानकर समय पर उचित प्रबंधन करें, तो फसल की पैदावार में बढ़ोतरी हो सकती है। इस लेख में बताए गए उपायों को अपनाकर किसान अपनी फसल को रोगमुक्त और मुनाफे का जरिया बना सकते हैं।
Comments are closed