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डीएपी की किल्लत के बीच नैनो डीएपी; जानिए किसानों के लिए कितना कारगर?

Nano DAP vs Granular DAP
Nano DAP vs Granular DAP

उत्तर भारत में डीएपी खाद की भारी किल्लत के चलते किसानों को लंबे इंतजार और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गेहूं की बुवाई का समय होने के कारण किसान डीएपी के बिना असमंजस में हैं। कई जगहों पर भारी भीड़ को काबू में रखने के लिए पुलिस का सहारा लेना पड़ रहा है। लेकिन इस सब के बीच, नैनो डीएपी (Nano DAP) का नाम चर्चा में है। क्या नैनो डीएपी दानेदार डीएपी का विकल्प हो सकता है? आइए जानते हैं इसका सही जवाब।


क्या नैनो डीएपी, दानेदार डीएपी का विकल्प है?

नहीं। नैनो डीएपी और दानेदार डीएपी का काम अलग-अलग है। दानेदार डीएपी का उपयोग फसलों की जड़ों में पोषण देने के लिए बुवाई के समय किया जाता है, जबकि नैनो डीएपी लिक्विड फॉर्म में उपलब्ध है और इसे फसलों की पत्तियों पर छिड़काव या बीज उपचार के लिए उपयोग किया जाता है।

मापदंड दानेदार डीएपी (Granular DAP) नैनो डीएपी (Liquid Nano DAP)
प्रयोग का समय बुवाई के दौरान बीज उपचार या पत्तियों पर छिड़काव
आवेदन की विधि मिट्टी में मिलाकर स्प्रे या बीज डुबाकर
रूप ठोस (दानेदार) तरल (लिक्विड)
लक्षित फसल भाग जड़ पत्तियां और बीज
प्रभाव धीमी गति से पोषण उपलब्ध कराना जल्दी असर दिखाना

नैनो डीएपी का उपयोग कैसे करें?

नैनो डीएपी का प्रयोग फसलों की जरूरत और चरण के अनुसार किया जाता है। इसका सही उपयोग फसल की उत्पादकता को बढ़ाने में मदद करता है।

1. बीज उपचार के लिए

  • खुराक: 3-5 मिली नैनो डीएपी प्रति किलो बीज।
  • बीज को 20-30 मिनट तक नैनो डीएपी घोल में भिगोकर रखें।
  • बीज को छाया में सुखाकर बुवाई करें।

2. जड़ों के लिए

  • अंकुर की जड़ों को 20-30 मिनट तक नैनो डीएपी घोल में डुबोएं।
  • फिर छाया में सुखाकर रोपाई करें।

3. पत्तियों पर छिड़काव

  • खुराक: 2-4 मिली प्रति लीटर पानी।
  • फसल की पत्तियों पर स्प्रे करें।
  • फूल आने से पहले एक बार और छिड़काव कर सकते हैं।

दानेदार डीएपी का उपयोग कैसे करें?

दानेदार डीएपी फसलों की जड़ों के पास मिट्टी में मिलाई जाती है। इसे बुवाई के समय या बुवाई के तुरंत बाद खेत में डालना फायदेमंद होता है।

डीएपी की प्रमुख विशेषताएं

  • जड़ों को लंबे समय तक पोषण देती है।
  • गेहूं, चावल, सब्जियां, और फूलों वाली फसलों के लिए उपयोगी।
  • भारी मिट्टी में बेहतर परिणाम देती है।

डीएपी की किल्लत और नैनो डीएपी की भूमिका

हालिया डीएपी संकट ने किसानों को बड़े पैमाने पर परेशान किया है। सरकारी विभाग का कहना है कि डीएपी की कोई कमी नहीं है, लेकिन किसानों को समय पर आपूर्ति नहीं हो रही। ऐसे में नैनो डीएपी एक वैकल्पिक समाधान हो सकता है, लेकिन यह दानेदार डीएपी का पूर्ण विकल्प नहीं है।


डीएपी और नैनो डीएपी में क्या चुनें?

यह फसल की जरूरत, मिट्टी की स्थिति, और बुवाई के समय पर निर्भर करता है।

  • यदि बुवाई करनी है, तो दानेदार डीएपी आवश्यक है।
  • फसल को अतिरिक्त पोषण देना हो, तो नैनो डीएपी का उपयोग करें।

नैनो डीएपी: पर्यावरण के लिए सुरक्षित विकल्प

  • नैनो डीएपी कम मात्रा में उपयोग से भी बेहतर परिणाम देता है।
  • इससे मिट्टी में रासायनिक खाद की मात्रा घटती है, जो पर्यावरण के लिए फायदेमंद है।
  • स्प्रे करने से पोषण सीधा पौधों तक पहुंचता है, जिससे कम मात्रा में ज्यादा फायदा मिलता है।

निष्कर्ष

डीएपी और नैनो डीएपी दोनों का महत्व अपने-अपने क्षेत्र में है। नैनो डीएपी को सही तरीके से और सही समय पर उपयोग करके किसान फसलों की उत्पादकता बढ़ा सकते हैं। लेकिन यह दानेदार डीएपी का विकल्प नहीं हो सकता। किसानों को अपनी फसल की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खाद का चयन करना चाहिए।

डीएपी की किल्लत के बीच नैनो डीएपी; जानिए किसानों के लिए कितना कारगर?

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