राजस्थान, 27 जनवरी 2025: सोना-चांदी से भी कीमती माने जाने वाले केसर की खेती अब केवल कश्मीर तक सीमित नहीं रही। राजस्थान के अजमेर जिले के 35 वर्षीय गुरकीरत सिंह ब्रोका ने अपनी मेहनत और आधुनिक तकनीक के सहारे इस असंभव को संभव कर दिखाया। गुरकीरत ने एयरोपोनिक तकनीक का उपयोग करते हुए अपने घर में बिना मिट्टी और पानी के केसर उगाने का काम शुरू किया है।
गुरकीरत की अनोखी शुरुआत
गुरकीरत सिंह ने 2024 में कश्मीर की यात्रा कर वहां केसर की खेती का बारीकी से अध्ययन किया। उन्होंने वहां से 100 किलो केसर के बीज खरीदे और उनकी सफाई एवं एंटी-फंगस ट्रीटमेंट किया। इसके बाद, अपने घर में एक विशेष लैब तैयार की, जिसमें कश्मीर जैसी जलवायु बनाने के लिए 10-12 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 2 टन का एयर कंडीशनर लगाया।
केसर की खेती में तकनीकी प्रयोग
गुरकीरत ने बताया कि बीजों को ट्रे में एक महीने तक अंधेरे में रखा गया। इसके बाद, सफेद एलईडी लाइट के साथ-साथ नीली और लाल रोशनी का उपयोग किया गया, जो पौधों की बेहतर वृद्धि के लिए उपयोगी साबित हुई। सितंबर में यह प्रक्रिया शुरू हुई, और दिसंबर के अंत तक पहली फसल तैयार हो गई।
विवरण | जानकारी |
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खेती की शुरुआत | सितंबर 2024 |
पहली फसल तैयार | दिसंबर 2024 |
पहली उपज | 150 ग्राम केसर |
कीमत | ₹1,000 प्रति ग्राम |
मुख्य बाजार | दिल्ली-एनसीआर, जयपुर, अहमदाबाद |
पहली फसल और मुनाफा
गुरकीरत की पहली फसल से उन्हें 150 ग्राम केसर प्राप्त हुआ, जिसे उन्होंने ₹1,000 प्रति ग्राम के हिसाब से बेचा। अपनी ऑनलाइन मार्केटिंग रणनीति के जरिए उन्होंने दिल्ली-एनसीआर से कई ऑर्डर प्राप्त किए। उनका कहना है कि पहली ही फसल से उनकी लागत पूरी हो गई, और अब वह इस खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
गुरकीरत का प्रेरणादायक सफर
गुरकीरत ने अजमेर से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। इसके बाद, उन्होंने बीटेक (इलेक्ट्रिकल) की डिग्री ली और मुंबई के एसपी जैन कॉलेज से एमबीए किया। एमबीए के दौरान, उन्हें 12 लाख रुपये का जॉब ऑफर मिला था, लेकिन उन्होंने अपनी खुद की राह चुनी। उनका यह साहसिक निर्णय आज उन्हें सफलता के शिखर पर ले गया है।
देश में नई संभावनाओं की दिशा
गुरकीरत का मानना है कि उनकी यह पहल देश में केसर उत्पादन के लिए एक नया आयाम स्थापित कर सकती है। एयरोपोनिक तकनीक का इस्तेमाल न केवल अधिक उत्पादन संभव बनाता है, बल्कि यह पानी और मिट्टी की कमी वाले क्षेत्रों में भी खेती को लाभकारी बनाता है।
गुरकीरत से सीखने की प्रेरणा
गुरकीरत का यह प्रयोग उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो खेती को पारंपरिक व्यवसाय मानते हैं। उनका यह प्रयास यह दिखाता है कि मेहनत और तकनीक के सही मिश्रण से कोई भी फसल, चाहे वह कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हो, लाभदायक बनाई जा सकती है।
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