Haryana BPL Update: हरियाणा सरकार ने राज्य में गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवनयापन करने वाले परिवारों के लिए एक बड़ी खुलासा किया है। विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक पिछले 5 सालों में बीपीएल और अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के कार्ड धारकों की संख्या में 5 गुना बढ़ोतरी हुई है। ये आंकड़े हैरान करने वाले हैं – जहां 2019 में राज्य में सिर्फ 11 लाख बीपीएल कार्ड धारक थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 51 लाख हो गई है। वहीं इन योजनाओं से लाभ पाने वाले लोगों की कुल संख्या भी 52 लाख से छलांग लगाकर 2.13 करोड़ तक पहुंच गई है।
क्या कहा मंत्री ने?
खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने विधायक पूजा चौधरी के सवाल के जवाब में यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सिर्फ अप्रैल 2022 से सितंबर 2024 के बीच ही बीपीएल कार्ड धारकों की संख्या में 37 लाख से ज्यादा नए नाम जुड़े हैं। अप्रैल 2022 में जहां 8.82 लाख बीपीएल कार्ड थे, वहीं आज यह संख्या 46.45 लाख को पार कर चुकी है। वहीं अंत्योदय अन्न योजना के तहत भी 54,705 नए कार्ड जारी किए गए हैं।
आखिर क्यों बढ़ी संख्या?
इस भारी बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं:
- सरकार ने पात्रता मानदंडों में ढील दी है
- नए सर्वेक्षण के बाद अधिक परिवारों को शामिल किया गया
- महामारी के बाद आर्थिक स्थिति खराब हुए परिवारों को शामिल किया गया
- जागरूकता अभियानों से अधिक लोगों ने आवेदन किया
क्या है अंत्योदय अन्न योजना?
अंत्योदय अन्न योजना (AAY) सबसे गरीब परिवारों के लिए चलाई जाती है जहां प्रति परिवार 35 किलो अनाज सिर्फ ₹1-3 प्रति किलो की दर पर मिलता है। हरियाणा में इसके तहत अब 2.92 लाख परिवारों को लाभ मिल रहा है।
क्या कहती है विपक्ष की आलोचना?
कांग्रेस विधायक भारत भूषण बत्रा ने इस बड़ी बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह आंकड़े साबित करते हैं कि राज्य में गरीबी बढ़ रही है। उनका कहना है कि अगर इतने सालों में इतने ज्यादा लोग बीपीएल श्रेणी में आ गए हैं तो यह सरकार की नीतियों की विफलता को दर्शाता है।
अब क्या करें नए आवेदक?
अगर आप भी हरियाणा में रहते हैं और बीपीएल कार्ड के लिए पात्र हैं तो:
- अपने नजदीकी सरल सेवा केंद्र पर जाएं
- आवश्यक दस्तावेज (आधार, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण) ले जाएं
- ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं
- आवेदन की स्थिति haryanafood.gov.in पर चेक करें
क्या यह वाकई मददगार?
जबकि सरकार का दावा है कि यह अधिक लोगों तक सहायता पहुंचाने की पहल है, विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक जरूरतमंदों की पहचान पर और काम करने की जरूरत है। कई मामलों में गैर-जरूरतमंद लोग भी इन योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं, जबकि वास्तविक गरीब अभी भी इनसे वंचित हैं।
हरियाणा सरकार के इन नए आंकड़ों ने निश्चित रूप से एक बड़ी बहस छेड़ दी है। अब देखना यह है कि क्या यह वृद्धि राज्य में गरीबी कम करने की दिशा में सही कदम है या फिर यह सिर्फ आंकड़ों का खेल है?
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