भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (IIOR) ने हाल ही में एक पेटेंट बायोपॉलिमर तकनीक विकसित की है, जो कृषि क्षेत्र में नई क्रांति लाने की क्षमता रखती है। यह तकनीक बीज संरक्षण और फसल उत्पादन में न केवल सुधार करेगी बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में भी मददगार होगी। इस नई तकनीक को दो निजी बीज कंपनियों को हस्तांतरित किया गया है, ताकि इसका व्यावसायीकरण और प्रसार तेजी से हो सके।
क्या है बायोपॉलिमर तकनीक?
IIOR द्वारा विकसित यह तकनीक एक विशेष बायोपॉलिमर का उपयोग करती है, जो बीज को कोटिंग करके उसकी उत्पादकता और सुरक्षा को बढ़ाती है। यह बीज कोटिंग एक टाइम-रिलीज कैप्सूल की तरह काम करती है, जो बीज के अंकुरित होने के साथ धीरे-धीरे पोषक तत्व और सूक्ष्मजीव पौधे तक पहुंचाती है।
इस तकनीक की मदद से:
- बीज को अंकुरण और बढ़ने के दौरान आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं।
- पर्यावरणीय तनाव जैसे सूखा, अत्यधिक गर्मी या कीटों के प्रति पौधे की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- बीज कोटिंग से फसल उत्पादन में 25-30% तक की वृद्धि हो सकती है।
कैसे करती है काम?
यह बायोपॉलिमर तकनीक बीज के चारों ओर एक सुरक्षात्मक परत बनाती है। यह परत धीरे-धीरे लाभकारी सूक्ष्मजीवों, पोषक तत्वों, और सुरक्षित रसायनों को पौधे तक पहुंचाती है। इससे पौधों को समय पर पोषण और कीटों से सुरक्षा मिलती है।
इस प्रक्रिया के फायदे:
- लागत में कमी: एक ही कोटिंग में कई आवश्यक इनपुट को मिलाकर किसानों के लिए लागत बचत।
- पर्यावरण के अनुकूल: रसायनों का कम उपयोग, जिससे पर्यावरण पर दुष्प्रभाव कम होगा।
- जलवायु परिवर्तन का सामना: तकनीक पौधों को जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने में मदद करती है।
IIOR का दृष्टिकोण और साझेदारी
IIOR ने इस तकनीक के व्यावसायीकरण के लिए दो प्रमुख बीज कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। संस्थान का लक्ष्य है कि यह तकनीक देश भर के किसानों तक पहुंचे और उनके लिए आसानी से सुलभ हो।
IIOR के प्रवक्ता का कहना है, “इस बायोपॉलिमर तकनीक से किसान न केवल अपनी फसल की पैदावार बढ़ा सकेंगे, बल्कि कृषि लागत को भी कम कर सकेंगे।”
संस्थान ने अपने जर्मप्लाज्म संग्रह को भी मजबूत किया है, जिसमें प्रमुख फसलों के हजारों किस्में शामिल हैं। जैसे:
- अरंडी: 3,289
- सूरजमुखी: 3,624
- कुसुम: 7,027
- तिल: 1,700
- अलसी: 2,885
- नाइजर: 3,524
तकनीक के भविष्य के लाभ
- किसानों को कीटनाशकों और उर्वरकों के बार-बार उपयोग की आवश्यकता नहीं होगी।
- सूखा और अत्यधिक गर्मी जैसे प्राकृतिक संकटों के दौरान भी फसल की गुणवत्ता बेहतर रहेगी।
- तकनीक किसानों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाएगी और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देगी।
IIOR की यह नई बायोपॉलिमर तकनीक न केवल कृषि में उत्पादन बढ़ाने का वादा करती है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी मदद करेगी। यह पहल भारत के किसानों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है, जो बदलते जलवायु परिस्थितियों और बढ़ती कृषि लागतों से जूझ रहे हैं।
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