Delhi Government Order: दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसते हुए एक बड़ा फैसला किया है। शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट निर्देश जारी करके सभी निजी स्कूलों को मना किया है कि वे छात्रों को किसी विशेष दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म या अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए बाध्य न करें। यह कदम अभिभावकों की लगातार शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिन्हें अक्सर स्कूलों द्वारा निर्धारित महंगे विक्रेताओं से सामान खरीदने के लिए मजबूर किया जाता था। अब माता-पिता अपनी सुविधा और बजट के अनुसार किसी भी दुकान से ये सामान खरीद सकेंगे।
इस नए आदेश में कहा गया है कि दिल्ली के कई निजी स्कूल छात्रों को विशिष्ट दुकानों से किताबें, नोटबुक, गाइड, यूनिफॉर्म, बैग, टाई और बेल्ट जैसी चीजें खरीदने के लिए मजबूर करते हैं, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ता है। सरकार ने इसे “शैक्षिक व्यावसायीकरण” बताते हुए गंभीर चिंता जताई है। शिक्षा निदेशालय के अनुसार, स्कूलों द्वारा ऐसी प्रथाओं को बंद करना होगा, अन्यथा डीएसईए एंड आर एक्ट, 1973 और बीएनएस (शिक्षा के व्यावसायीकरण पर प्रतिबंध) अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
शिकायत करने के लिए हेल्पलाइन और ईमेल जारी
अभिभावक अब किसी भी स्कूल द्वारा ऐसी जबरदस्ती की गई तो शिकायत कर सकते हैं। सरकार ने इसके लिए एक विशेष हेल्पलाइन नंबर (9818154069) और ईमेल (ddeac1@gmail.com) जारी किया है। शिकायत मिलने पर दोषी पाए जाने वाले स्कूलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह निर्णय छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है ताकि शिक्षा को सस्ती और सुलभ बनाया जा सके।
क्या कहता है नया आदेश?
- स्कूल किसी विशेष विक्रेता से सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।
- अभिभावकों को अपनी पसंद की दुकान से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने की स्वतंत्रता होगी।
- स्कूल यदि नियम तोड़ते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
- शिकायत करने के लिए हेल्पलाइन और ईमेल सुविधा शुरू की गई है।
इस फैसले से दिल्ली के हजारों अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो अब तक स्कूलों द्वारा थोपे गए महंगे विकल्पों का बोझ ढो रहे थे। सरकार का यह कदम शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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