बिहार के किसानों और बिजली उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी है। बिहार राज्य विद्युत विनियामक आयोग (BERC) ने 1 अप्रैल से बिजली दरों में बड़ा बदलाव करते हुए किसानों, ग्रामीण उपभोक्ताओं और कोल्ड स्टोरेज यूनिट्स को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। अब स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगवाने वाले उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 25 पैसे की छूट मिलेगी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की दरें 54 पैसे प्रति यूनिट तक सस्ती होंगी। इसका सीधा फायदा बिहार के किसानों को मिलेगा, खासकर धान की खेती करने वालों को, जिनकी बिजली लागत में अब काफी कमी आएगी।
किसानों को मिल रहा है डबल फायदा
अगर आप बिहार के किसान हैं और स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगवाते हैं, तो आपको दोहरा फायदा मिलेगा। पहला, मीटर लगवाने के छह महीने तक अगर आप अपने लोड से ज्यादा बिजली खपत करते हैं, तो कोई जुर्माना नहीं लगेगा। दूसरा, ग्रामीण इलाकों में स्मार्ट मीटर लगवाने वाले किसानों को 79 पैसे प्रति यूनिट की बड़ी छूट मिलेगी। यह कदम खेती-किसानी में बिजली की बढ़ती लागत को कम करने के लिए बेहद अहम है, क्योंकि अब ट्यूबवेल और पंप चलाने में किसानों का खर्च काफी घट जाएगा।
ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के लिए नई दरें
बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बिजली दरों को दो स्लैब में बांटा है। अगर आपकी खपत 50 यूनिट से कम है, तो आपको 7.42 रुपये प्रति यूनिट का बिल देना होगा। वहीं, 50 यूनिट से ज्यादा बिजली खर्च करने वालों को 54 पैसे प्रति यूनिट की छूट मिलेगी। शहरी इलाकों में भी 100 यूनिट तक की खपत पर 7.42 रुपये प्रति यूनिट का ही चार्ज लगेगा, लेकिन इससे अधिक बिजली इस्तेमाल करने पर 8.95 रुपये प्रति यूनिट देना होगा। ये नई दरें 31 मार्च 2026 तक लागू रहेंगी, जिससे लंबे समय तक उपभोक्ताओं को फायदा मिलता रहेगा।
कोल्ड स्टोरेज और उद्योगों को भी मिली राहत
कृषि क्षेत्र से जुड़े कोल्ड स्टोरेज यूनिट्स के लिए भी सरकार ने बड़ी छूट दी है। अब 74 किलोवाट तक की क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज को एलटी-आईएएस श्रेणी में रखा गया है, जबकि 50 केवीए से 1500 केवीए तक के कोल्ड स्टोरेज के लिए अलग श्रेणी बनाई गई है। इससे किसानों के फल-सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों के भंडारण की लागत कम होगी। वहीं, औद्योगिक इकाइयों के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को BERC ने खारिज कर दिया है। साथ ही, अगर उद्योग डिजिटल भुगतान करते हैं, तो उन्हें 1% या 50,000 रुपये तक की अतिरिक्त छूट भी मिल सकती है।
क्या है बिहार सरकार का मकसद?
इस नए फैसले से बिहार सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना और बिजली की बर्बादी को रोकना है। स्मार्ट मीटर लगाने से बिजली चोरी पर अंकुश लगेगा और उपभोक्ताओं को उनकी वास्तविक खपत के हिसाब से बिल मिलेगा। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में सस्ती बिजली से कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। अब देखना यह है कि यह योजना जमीन पर कितनी कारगर साबित होती है और बिहार की बिजली व्यवस्था (Bihar Electricity) में कितना सुधार आता है।
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