EPFO पेंशन: कर्मचारियों की मांग, न्यूनतम पेंशन 1,000 से बढ़ाकर 9,000 रुपये किया जाए
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत आने वाले कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी खबर है। यूनिफाइड पेंशन स्कीम की घोषणा और EPFO 3.0 योजना की चर्चाओं के बीच, सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। पेंशनर्स संघ का कहना है कि वर्तमान में 1,000 रुपये प्रति माह की न्यूनतम पेंशन बहुत कम है और इसे बढ़ाकर 9,000 रुपये किया जाना चाहिए।
क्यों जरूरी है पेंशन में बढ़ोतरी?
EPFO के तहत आने वाले प्राइवेट कर्मचारियों को कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के माध्यम से न्यूनतम पेंशन मिलती है। सितंबर 2014 में केंद्र सरकार ने EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये प्रति माह की घोषणा की थी। हालांकि, पेंशनभोगियों का कहना है कि महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत को देखते हुए यह राशि बहुत कम है।
पेंशनर्स संघ की मांग
हाल ही में महाराष्ट्र के नासिक में पेंशनभोगियों ने EPFO कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग की। EPS-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से इस संबंध में चर्चा की थी। उम्मीद थी कि बजट 2025-26 में इस पर कोई ऐलान होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मद्रास लेबर यूनियन और बी एंड सी मिल्स स्टाफ यूनियन ने भी केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया से पेंशन 9,000 रुपये प्रति महीने करने का आग्रह किया है।
EPFO की योजनाएं और पेंशनर्स की स्थिति
EPFO के तहत लगभग 186 संस्थान आते हैं, और 80 लाख पेंशनभोगी EPS-95 के तहत लाभान्वित होते हैं। इनमें से 18 लाख पेंशनभोगी अकेले महाराष्ट्र से हैं। पेंशनर्स संघ का कहना है कि वर्तमान पेंशन राशि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
सरकार की प्रतिक्रिया
श्रम मंत्रालय ने 2023 में वित्त मंत्रालय को न्यूनतम पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिली। पेंशनभोगियों का कहना है कि सरकार को इस मुद्दे पर तुरंत कदम उठाना चाहिए और पेंशन राशि में वृद्धि करनी चाहिए।
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