Karan Vandana DBW 187 : गेहूं की फसल रबी की प्रमुख फसलों में से एक है, और इस समय देशभर के किसान इसकी बुवाई में जुटे हुए हैं। बुवाई के लिए सही बीज का चुनाव और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल अच्छे उत्पादन का आधार होता है। आज हम बात कर रहे हैं गेहूं की एक बेहतरीन और लोकप्रिय किस्म DBW-187 (करण वंदना) की, जिसे देशभर के किसान अपनी फसल में प्राथमिकता दे रहे हैं।
यह किस्म विशेष रूप से उत्तर भारत के किसानों के लिए उपयुक्त है और कई रोगों के प्रति प्रतिरोधी होने के साथ-साथ उत्पादन में भी अव्वल है। आइए जानते हैं इस किस्म की विशेषताएं, बुवाई का सही तरीका, और अधिकतम उत्पादन के लिए जरूरी सुझाव।
DBW-187 किस्म की विशेषताएं
- पकने का समय: यह किस्म बुवाई के बाद मात्र 118 से 124 दिन में पककर तैयार हो जाती है।
- उपज: इस किस्म की औसत उपज 19.5 क्विंटल प्रति एकड़ है, जबकि अधिकतम उपज 25.9 क्विंटल प्रति एकड़ तक हो सकती है।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता: यह किस्म कई फफूंद जनित रोगों से प्रतिरोधी है, जिससे किसानों को बीमारियों का खतरा कम रहता है।
- उपयुक्त क्षेत्र: यह किस्म खासतौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के लिए उपयुक्त है।
बुवाई का सही समय और प्रक्रिया
DBW-187 किस्म की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय नवंबर का महीना है। इस समय का मौसम और तापमान इस किस्म के विकास के लिए आदर्श माना जाता है।
बुवाई के पहले तैयारी:
- मिट्टी का चयन: इस किस्म के लिए समतल, उपजाऊ और जल निकासी वाली मिट्टी सबसे अच्छी होती है।
- खेत की तैयारी: बुवाई से पहले खेत को अच्छी तरह समतल और खरपतवार मुक्त करना चाहिए।
- बीज उपचार: बीजों को कार्बोक्सिन की 2-3 ग्राम मात्रा प्रति किलो बीज के हिसाब से उपचारित करना चाहिए। इससे फफूंद जनित रोगों से बचाव होता है।
बुवाई की विधि:
- बीज दर: एक एकड़ भूमि के लिए 40 किलो बीज पर्याप्त होता है।
- बीजों के बीच की दूरी: बुवाई के दौरान पौधों के बीच 5 सेंटीमीटर की दूरी बनाए रखें।
- खाद और उर्वरक: बुवाई के समय नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करें।
सिंचाई और देखभाल के सुझाव
DBW-187 किस्म को 4 से 5 सिंचाइयों की जरूरत होती है।
- पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद करें।
- इसके बाद हर 20 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करते रहें।
- सुनिश्चित करें कि खेत में जलभराव न हो, क्योंकि यह फसल के विकास को प्रभावित कर सकता है।
उत्पादन बढ़ाने के लिए अन्य जरूरी बातें
- खरपतवार नियंत्रण: फसल को खरपतवार से बचाने के लिए निराई-गुड़ाई समय पर करें।
- संतुलित उर्वरक का प्रयोग: पौधों की जरूरत के अनुसार खाद और उर्वरकों का सही मात्रा में उपयोग करें।
- रोग प्रबंधन: रोगों की पहचान होते ही सही फफूंदनाशकों का छिड़काव करें।
DBW-187 किस्म क्यों है खास?
DBW-187 (करण वंदना) को वैज्ञानिक रूप से विकसित किया गया है, ताकि यह बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ रोगों से भी लड़ सके। यह किस्म विशेष रूप से उन किसानों के लिए फायदेमंद है, जो कम समय में अधिक उपज चाहते हैं।
निष्कर्ष
अगर आप इस रबी सीजन में गेहूं की अच्छी फसल चाहते हैं, तो DBW-187 (करण वंदना) किस्म आपके लिए सबसे बेहतर विकल्प हो सकती है। सही तकनीक, समय पर बुवाई और बेहतर देखभाल से किसान इस किस्म से शानदार उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
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