नई दिल्ली। लहसुन की खेती (Garlic Farming) करने वाले किसानों के लिए यह खबर बेहद काम की है। अक्सर लहसुन की फसल रोगों और कीटों के हमलों की वजह से प्रभावित होती है, जिससे उत्पादन में कमी और गुणवत्ता पर असर पड़ता है। सही पहचान और प्रबंधन से किसान इन समस्याओं को नियंत्रित कर सकते हैं। इस लेख में लहसुन की प्रमुख समस्याओं और उनके समाधान को विस्तार से बताया गया है।
लहसुन की फसल पर थ्रिप्स कीट का खतरा
संक्रमण का समय:
लहसुन की बुवाई के 45 दिनों के भीतर थ्रिप्स कीट का प्रकोप होता है।
लक्षण:
पीले रंग के छोटे कीट पत्तियों का रस चूसते हैं।
पत्तियों पर धब्बे और सूखने की समस्या।
नियंत्रण के उपाय:
कीटनाशक | मात्रा | पानी की मात्रा | छिड़काव का समय |
---|---|---|---|
इमिडाक्लोप्रिड | 5 मिली | 15 लीटर | 15 दिन के अंतराल पर |
थायेमेथाक्झाम | 125 ग्राम प्रति हेक्टेयर | 15 दिन के अंतराल पर |
शीर्ष छेदक कीट का प्रबंधन
प्रभाव:
यह कीट पत्तियों को खाकर लहसुन के अंदर घुस जाता है और इसे सड़ा देता है।
नियंत्रण:
इमिडाक्लोप्रिड की 5 मिली मात्रा को 15 लीटर पानी में मिलाकर हर 15 दिन पर छिड़काव करें।
बैंगनी धब्बा रोग (Purple Blotch)
लक्षण:
तनों और पत्तियों पर सफेद धब्बे बनना।
पौधा कमजोर होकर गिर जाता है।
प्रबंधन:
जी-50, जी-1 और जी 323 किस्मों की बुवाई करें।
खड़ी फसल में मैकोजेब की 2.5 ग्राम मात्रा को एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
झुलसा रोग (Blight Disease)
लक्षण:
सफेद और हल्के पीले धब्बे, जो बाद में भूरे रंग में बदल जाते हैं।
उपचार:
कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या मैनकोजेब की 3 ग्राम मात्रा को एक लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण में सावधानियां
सिंचाई का सही समय:
फसल पकने की अवस्था में 10-15 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करें।
खेत में पानी का ठहराव न होने दें।
खरपतवार प्रबंधन:
फसल के अंकुरण से पहले पेंडामेथिलीन की 1 किलो मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।
लहसुन की फसल बचाने के टिप्स
कीट और रोगों की समय पर पहचान करें।
फसल की नियमित निगरानी करें।
रोग प्रतिरोधक किस्मों का चयन करें।
Comments are closed