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दोगुना दूध देंगी गाय और भैंस, नई नस्लें तैयार कर रहे वैज्ञानिक

Milk Production
Milk Production

Milk Production: आने वाले समय में भारतीय किसान और डेयरी उद्योग को बड़ी खुशखबरी मिलने वाली है। केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान (Central Institute for Research on Cattle) के वैज्ञानिकों ने गाय और भैंस की ऐसी नस्लें तैयार करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है, जो मौजूदा नस्लों की तुलना में दोगुना अधिक दूध (Milk) उत्पादन कर सकेंगी। यह जानकारी संस्थान के निदेशक डॉ. एके मोहंती ने एनिमल फिजियोलॉजिस्ट ऑफ इंडिया सोसायटी के 32वें वार्षिक सम्मेलन में दी।

नई तकनीक से बदल रही है तस्वीर

डॉ. मोहंती के अनुसार, ओमिक्स प्रौद्योगिकियां (Omics Technologies) पशुधन उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार के लिए क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं। नई तकनीकें न केवल दूध उत्पादन बढ़ाएंगी, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले जानवरों की नस्ल तैयार करने में भी मददगार होंगी। इसके लिए गाय और भैंस के एग्स को विशेष तकनीक के माध्यम से फर्टिलाइज करके बेहतर नस्ल के 10-10 बच्चे पैदा किए जा रहे हैं।

वैज्ञानिकों का दावा: 10 बच्चों वाली तकनीक

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्व उपमहानिदेशक पद्मश्री डॉ. मोतीलाल मदान ने बताया कि परंपरागत तौर पर एक गाय या भैंस 14 महीने में एक ही बच्चा देती थी। लेकिन अब नई तकनीक की मदद से एक ही बार में 10-10 बच्चे पैदा हो सकते हैं। यह प्रक्रिया न केवल दूध उत्पादन बढ़ाएगी बल्कि किसानों को उन्नत नस्ल के जानवर भी उपलब्ध कराएगी।

दुनिया का पहला परखनली शोध

नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (NDRI) ने एक ऐतिहासिक शोध किया है, जिसमें भैंस के गर्भ में अंडा प्रत्यारोपित कर बच्चा पैदा किया गया। इस तकनीक ने भारत को डेयरी क्षेत्र में वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह शोध भैंस के दूध उत्पादन को और बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

पशुधन के प्रति जिम्मेदारी जरूरी

डॉ. मदान ने कहा कि गाय और भैंस जैसे पशुओं को केवल आय का स्रोत मानना सही नहीं है। किसानों को इनसे पूरा लगाव और देखभाल करनी चाहिए। कई किसान केवल दूध उत्पादन के दौरान ही पशुओं का ध्यान रखते हैं, और बाद में उन्हें बेसहारा छोड़ देते हैं। यह न केवल पशु के लिए, बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए भी नुकसानदायक है।

नई तकनीक से किसानों को लाभ

नई तकनीकों का उद्देश्य किसानों की आय को दोगुना करना और दुग्ध उत्पादन को नई ऊंचाई पर ले जाना है। इससे भारतीय डेयरी उद्योग आत्मनिर्भर बनेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के व्यावसायीकरण से भारत दूध उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर कायम रहेगा।

दूध उत्पादन बढ़ाने के प्रमुख फायदे:

फायदा विवरण
उन्नत नस्लें नई तकनीक से बेहतर नस्ल के पशु मिलेंगे।
दूध उत्पादन में वृद्धि प्रति पशु उत्पादन में 50-100% तक वृद्धि।
किसानों की आय बढ़ेगी अधिक दूध से अधिक मुनाफा।
पर्यावरणीय लाभ स्थायी कृषि और बेहतर संसाधन प्रबंधन।

यह तकनीक भारतीय कृषि और डेयरी उद्योग के लिए एक बड़ी क्रांति साबित होगी। उन्नत नस्लों, अधिक दूध उत्पादन और बेहतर संसाधन उपयोग के साथ, यह पहल किसानों को सशक्त बनाएगी और देश को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगी।

दोगुना दूध देंगी गाय और भैंस, नई नस्लें तैयार कर रहे वैज्ञानिक

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