सरसों की फसल भारत की प्रमुख रबी फसलों में से एक है, और देश के कई हिस्सों में इसकी बुवाई पूरी हो चुकी है। बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा कमाने के लिए किसानों को फसल के प्रबंधन में कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सरसों की खेती में तना गलन रोग, सिंचाई प्रबंधन, और खरपतवार नियंत्रण जैसे तीन प्रमुख विषयों पर ध्यान देने से फसल की गुणवत्ता और पैदावार में सुधार हो सकता है। आइए जानते हैं इन विषयों पर विस्तार से।
1. तना गलन रोग: बड़ा खतरा, लेकिन समाधान संभव
सरसों की फसल में तना गलन रोग (Stem Rot) का खतरा हमेशा बना रहता है। यह बीमारी पौधों के तनों, पत्तियों और फलियों को प्रभावित करती है। इस रोग के लक्षण पहचानना और समय पर इसका उपचार करना बेहद जरूरी है।
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रोग के लक्षण:
- पौधों पर सफेद धब्बे और रूई जैसी फंगस का विकास।
- पौधों के तने कमजोर होकर गिरने लगते हैं।
- फलियों का उत्पादन कम हो जाता है।
रोग नियंत्रण के उपाय:
उपाय | विवरण |
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प्रभावित पौधों का निपटारा | संक्रमित पौधों और उनके अवशेषों को एकत्रित करके जला दें। |
रासायनिक उपचार | कार्बेन्डाजिम (0.05%) या लहसुन के 2% घोल का छिड़काव करें। |
सिंचाई प्रबंधन | अधिक नमी और ठंडे वातावरण में रोग का प्रसार तेज होता है। सिंचाई में सावधानी रखें। |
वायु संचार व्यवस्था | खेतों में हवा के उचित प्रवाह के लिए पौधों की छंटाई करें। |
2. सिंचाई प्रबंधन: सही समय और मात्रा जरूरी
सरसों की फसल में सिंचाई का सही प्रबंधन फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को सीधे प्रभावित करता है। अधिक या कम पानी देना, दोनों ही फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
सिंचाई का समय:
सिंचाई | समय |
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पहली सिंचाई | बुवाई के 35-40 दिन बाद। |
दूसरी सिंचाई | शुष्क मौसम में 60-70 दिन बाद। |
द्विफसलीय खेती वाले क्षेत्र | पहली सिंचाई 40-45 दिन और दूसरी 70-75 दिन पर करें। |
अन्य सुझाव:
- खेतों में पानी का ठहराव न होने दें।
- सिंचाई के दौरान पौधों के चारों ओर मिट्टी को ढीला करें।
3. खरपतवार नियंत्रण: फसल की वृद्धि में बाधा से बचाव
खरपतवार सरसों की फसल के लिए बड़ी समस्या बन सकते हैं। ये फसल के पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, जिससे फसल कमजोर हो जाती है। खरपतवार को नियंत्रण करने के तरीके पढ़ें
खरपतवार प्रबंधन के उपाय:
उपाय | विवरण |
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गुड़ाई | बुवाई के 25-30 दिन बाद पहली गुड़ाई और 50 दिन बाद दूसरी गुड़ाई करें। |
खरपतवारनाशक दवाएं | पेण्डीमेथालिन (2.5-3 लीटर/हेक्टेयर) बुवाई के तुरंत बाद उपयोग करें। |
औरोबंकी खरपतवार नियंत्रण | पौधों को उखाड़कर गड्ढे में दबा दें और फसल चक्र अपनाएं। |
सकरी पत्ती वाले खरपतवार | क्वीजीलोफॉप इथाइल (800-1000 मिली/हेक्टेयर) का छिड़काव करें। |
इन बातों का भी रखें ध्यान
- फसल में रोग और कीटों की पहचान के लिए नियमित निरीक्षण करें।
- खेत में पानी के जमाव से बचें, क्योंकि यह फफूंद जनित रोगों को बढ़ावा देता है।
- पौधों के आस-पास मिट्टी को समय-समय पर ढीला करें ताकि पोषक तत्व ठीक से पहुंच सकें।
सरसों की खेती में ये सुझाव बनाएंगे सफल किसान
सरसों की फसल के प्रबंधन में तना गलन रोग से बचाव, सिंचाई का सही तरीका और खरपतवार नियंत्रण तीन अहम पहलू हैं। इन पर ध्यान देकर किसान न केवल अपनी फसल की गुणवत्ता को सुधार सकते हैं, बल्कि बाजार में बेहतर मूल्य भी प्राप्त कर सकते हैं।
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