Wheat Price : किसानों के लिए बुरी खबर है क्योंकि गेहूं की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले 15 दिनों में गेहूं के भाव में 650 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ चुकी है। होलिका दहन से ठीक पहले 12 मार्च को गेहूं थोक बाजार में 3,100 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था, लेकिन अब यह घटकर मात्र 2,450 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। यह गिरावट किसानों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है, खासकर तब जब फसल की कटाई अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुई है।
क्यों गिर रहे हैं गेहूं के दाम?
गेहूं व्यापारियों के मुताबिक, जब कीमतें ऊंची थीं तब कारोबारियों ने बड़ी मात्रा में गेहूं का स्टॉक जमा कर लिया था। अब जब नई फसल आने वाली है और उत्पादन अच्छा होने की संभावना है, तो इन कारोबारियों ने अपना पुराना स्टॉक बाजार में उतारना शुरू कर दिया है। इस वजह से बाजार में गेहूं की आपूर्ति बढ़ गई है और कीमतें तेजी से गिर रही हैं।
सरकार ने भी गेहूं के स्टॉक पर नजर रखने के लिए नए नियम बनाए हैं। 31 मार्च तक व्यापारियों के पास अधिकतम 250 टन गेहूं का ही स्टॉक रखने की अनुमति है। इसके बाद 1 अप्रैल से उन्हें हर शुक्रवार को अपना स्टॉक ऑनलाइन रिपोर्ट करना होगा। इस कारण भी कई व्यापारियों ने अपना स्टॉक बाजार में उतारना शुरू कर दिया है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
क्या होगा आगे?
अभी गेहूं की कटाई पूरी तरह शुरू नहीं हुई है, लेकिन अप्रैल के महीने में जब फसल पूरी तरह सूख जाएगी और बाजार में आने लगेगी, तो कीमतों में और गिरावट आ सकती है। हालांकि, अगर इस साल गेहूं का दाना सिकुड़ा हुआ आता है और उत्पादन कम होता है, तो कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।
सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 2,425 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन बाजार में नकद भुगतान मिलने की वजह से किसान क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के बजाय सीधे बाजार में बेचना पसंद कर रहे हैं। अगर कीमतें 2,350 रुपये प्रति क्विंटल तक भी गिर जाती हैं, तो क्रय केंद्रों पर गेहूं की आवक कम हो सकती है, क्योंकि वहां सख्त जांच होती है और भुगतान भी तुरंत नहीं मिलता।
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