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गाय या भैंस अगर गोबर-मिट्टी, कपड़ा-कागज खा रहा है तो हो सकती हैं खतरनाक बीमारी, जानिए लक्षण, कारण और इलाज

गाय-भैंस में पाइका (Pica) बीमारी क्यों होती है? जानें लक्षण, कारण और सही इलाज। मिनरल की कमी को कैसे पूरा करें? Meghdoot Agro के विशेषज्ञ सलाह।

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Pica in animals : अगर आपके गाय-भैंस या दूसरे पशु अचानक कागज, कपड़े, मिट्टी, अपना गोबर या फिर मरे हुए जानवरों की हड्डियाँ चबाने लगें, तो समझ जाइए कि वो पाइका (Pica) नाम की गंभीर बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। ये बीमारी सिर्फ गाय-भैंस ही नहीं, बल्कि भेड़-बकरी, घोड़े और कुत्तों में भी हो सकती है। असल में, जब पशु के आहार में जरूरी मिनरल्स जैसे फॉस्फोरस, कोबाल्ट, नमक आदि की कमी हो जाती है, तो वो गैर-खाद्य चीजें खाने लगता है, जिससे उसकी सेहत को गंभीर नुकसान पहुँचता है।

पाइका (Pica) क्यों होता है? मुख्य वजहें

पशु विशेषज्ञों के मुताबिक, मार्च से जून तक का मौसम पाइका बीमारी का सबसे खतरनाक समय होता है, क्योंकि इस दौरान हरे चारे की कमी हो जाती है और पशु को पोषक तत्व नहीं मिल पाते। इसके अलावा, निम्न कारण भी पाइका को जन्म देते हैं:

  • मिनरल्स की कमी (फॉस्फोरस, कोबाल्ट, नमक, कैल्शियम आदि)
  • पशु को बहुत तंग बाड़े में रखना
  • पेट में कीड़े (वर्म) होना
  • पेट या पित्ताशय से जुड़ी बीमारियाँ

पाइका के प्रकार – पशु क्या-क्या खाने लगता है?

पाइका बीमारी कई तरह की होती है, जिसमें पशु अलग-अलग अजीबोगरीब चीजें खाने लगता है:

  1. कोप्रोफेजिया – पशु अपना या दूसरे पशुओं का गोबर खाने लगता है।
  2. इनफेंटोफेजिया – मादा पशु अपने ही नवजात बच्चे को खाने की कोशिश करती है।
  3. ऑस्टियोफेजिया – पशु मरे हुए जानवरों की हड्डियाँ चबाने लगता है।
  4. साल्ट हंगर – पशु अपनी या दूसरे पशु की चमड़ी चाटने लगता है।

पाइका के लक्षण – कैसे पहचानें?

  • पशु खाना-पीना कम कर देता है।
  • वो अपनी सामान्य खुराक छोड़कर मिट्टी, कपड़े, कागज जैसी चीजें खाने लगता है।
  • दूध उत्पादन कम हो जाता है और पशु दुबला होने लगता है।
  • चमड़ी शरीर से चिपक जाती है और कभी-कभी पेट फूलने (आफरा) की समस्या भी होती है।

पाइका का इलाज – पशुपालक क्या करें?

अगर आपका पशु पाइका से पीड़ित है, तो निम्न उपाय करें:

✅ पौष्टिक आहार दें – हरा चारा, साइलेज, पुआल और फाइबर युक्त आहार बढ़ाएँ।
✅ मिनरल मिक्सचर दें – रोजाना 40-50 ग्राम मिनरल मिक्सचर खिलाएँ या नांद में मिनरल ईंट रख दें।
✅ नमक दें – 50 ग्राम सादा नमक रोजाना आहार में मिलाएँ।
✅ कृमिनाशक दवा दें – पेट के कीड़े मारने के लिए नियमित डीवॉर्मिंग करें।
✅ इंजेक्शन लगवाएँ – फॉस्फोरस और विटामिन A, D, E के इंजेक्शन एक हफ्ते तक दें।
✅ फॉस्फोरस युक्त पानी दें – पीने के पानी में फॉस्फोरस मिलाकर पिलाएँ।

मेघदूत एग्रो की सलाह:

हमारे मिनरल मिक्सचर और पशु स्वास्थ्य उत्पाद आपके पशुओं को पाइका जैसी बीमारियों से बचाने में मदद करेंगे। अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएँ या नजदीकी डीलर से संपर्क करें!

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