हरियाणा में 31 मार्च से तीन नए आपराधिक कानून लागू होने जा रहे हैं, जिसके लिए पुलिस और गृह विभाग ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम नामक इन नए कानूनों के लागू होने से प्रदेश की न्याय प्रणाली में बड़ा बदलाव आएगा। इन कानूनों के तहत, केस दर्ज करने, जांच रिपोर्ट पेश करने, कोर्ट में सुनवाई और फैसले की अवधि तय होने से पीड़ितों को पहले की अपेक्षा जल्द न्याय मिलेगा।
विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल ने 31 मार्च से नए कानून लागू करने की पुष्टि की। प्रदेश में साल 2024 में 1,36,269 मुकदमे दर्ज हुए हैं, जो पिछले साल की तुलना में 16,216 कम हैं। इस साल आपराधिक घटनाओं में 14.62% की कमी आई है, जो नए कानूनों के लागू होने से और कम होने की उम्मीद है।
प्रदेश के सभी पुलिस थानों को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) से जोड़ा जा चुका है, जिससे एफआईआर का डेटा तुरंत अपलोड किया जा रहा है। नेशनल साइबर हेल्पलाइन 1930 का स्कोर भी 100% है।
नए कानूनों के तहत, दुष्कर्म या छेड़खानी की पीड़िता की मर्जी के अनुसार पुलिस खुद उसके पास जाकर बयान दर्ज करने लगी है। विदेश में बैठे गैंगस्टर या अपराधियों पर कोर्ट में पेशी के बगैर केस चलाने और सजा सुनाने का अधिकार भी नए कानून में है। पुलिस व्हाट्सएप पर समन भेज रही है, जिससे सरकारी खर्च में कमी आएगी।
नए कानूनों के तहत जनता को कई अधिकार मिलेंगे। नागरिक किसी भी पुलिस थाने में जीरो एफआईआर दर्ज करा सकेंगे, चाहे उस थाने का अधिकार क्षेत्र कुछ भी हो। जीरो एफआईआर को क्षेत्राधिकार वाले पुलिस स्टेशन को 15 दिनों के भीतर भेजना अनिवार्य होगा।
गवाही के लिए कोर्ट नहीं जाना पड़ेगा, क्योंकि जिरह अपील सहित पूरी सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाएगी। यौन अपराधों के पीड़ितों के बयान दर्ज करते समय और तलाशी और जब्ती के दौरान वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी। किसी भी अपराध में शामिल वाहनों की जब्ती की भी वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी।
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