rice and wheat stock भारत में चावल और गेहूं के भंडारण की स्थिति में भारी असंतुलन देखने को मिल रहा है। जहां चावल का भंडारण रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, वहीं गेहूं के भंडारण में भारी कमी देखने को मिल रही है। यह स्थिति सरकार के लिए एक नई चुनौती पैदा कर रही है, क्योंकि चावल का निर्यात बढ़ने की उम्मीद है, जबकि गेहूं की आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। किसान, व्यापारी और सरकार इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। आइए, जानते हैं इस रिपोर्ट में और क्या जानकारी दी गई है और इस असंतुलन के कारण क्या प्रभाव पड़ सकते हैं।
चावल के भंडारण में रिकॉर्ड वृद्धि
भारत में चावल का भंडारण वर्तमान में रिकॉर्ड स्तर पर है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी तक सरकारी गोदामों में चावल और धान का कुल भंडार 609 लाख टन था, जो सरकार के लक्ष्य से आठ गुना अधिक है। यह स्थिति चावल के निर्यात को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है, खासकर जब भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक बन चुका है। चावल का भंडारण इतना अधिक है कि सरकार को इसे निपटाने के लिए नए रास्ते खोजने होंगे।
गेहूं के भंडारण में कमी
दूसरी ओर, गेहूं के भंडारण में कमी आई है। 1 जनवरी तक सरकारी गोदामों में गेहूं का भंडार केवल 184 लाख टन था, जो सरकार के निर्धारित लक्ष्य 138 लाख टन से थोड़ा ज्यादा है। इस गिरावट के कारण व्यापारी सरकार से गेहूं की बिक्री बढ़ाने का अनुरोध कर रहे हैं, ताकि बाजार में गेहूं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। इस स्थिति में गेहूं के भंडारण को लेकर सरकार को काफी सतर्क रहना होगा, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कमी न हो।
गेहूं की बिक्री को लेकर व्यापारी की चिंताएं
गेहूं के भंडारण में कमी को लेकर व्यापारी चिंतित हैं। वे सरकार से अनुरोध कर रहे हैं कि गेहूं की बिक्री बढ़ाई जाए, ताकि बाजार में गेहूं की कीमतें नियंत्रण में रह सकें। सरकार ने गेहूं की बिक्री में कुछ कमी की है, जिससे व्यापारी निराश हैं। एक मुंबई स्थित वैश्विक व्यापार कंपनी के एक डीलर के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले इस साल खुले बाजार में कम गेहूं बेचा जा रहा है। इससे गेहूं की उपलब्धता में कमी आई है और भविष्य में गेहूं की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
चावल और गेहूं के भंडारण में असंतुलन
चावल और गेहूं के भंडारण में इस असंतुलन से सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। आंध्र प्रदेश के काकीनाडा के एक निर्यातक के अनुसार, कुछ राज्यों में अभी भी धान की खरीद जारी है, जिससे सरकार को चावल के अतिरिक्त भंडारण के लिए जगह ढूंढनी पड़ रही है। वहीं, गेहूं के कम भंडारण के कारण गेहूं की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है। यह असंतुलन सरकार के लिए एक जटिल स्थिति पैदा कर रहा है।
सरकार द्वारा गेहूं खरीद का लक्ष्य
भारत सरकार ने आगामी रबी विपणन सत्र 2025-26 के लिए 3 करोड़ टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य तय किया है। यह निर्णय विभिन्न राज्यों के खाद्य सचिवों के साथ चर्चा के बाद लिया गया है। कृषि मंत्रालय ने रबी फसल सत्र 2024-25 में गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान लगाया है। सरकार ने 11.5 करोड़ टन गेहूं के उत्पादन का अनुमान लगाया है, और इसके बावजूद सरकार ने खरीद का लक्ष्य अपेक्षाकृत कम रखा है।
गेहूं की फसल की स्थिति
अच्छी खबर यह है कि गेहूं की फसल की स्थिति इस बार काफी अनुकूल बताई जा रही है। गेहूं की बुवाई का काम लगभग पूरा हो चुका है, और कई राज्यों में यह फसल अच्छी हो रही है। हालांकि, सरकार द्वारा निर्धारित खरीद का लक्ष्य गेहूं के अनुमानित उत्पादन से काफी कम है। इस असंतुलन के कारण भविष्य में गेहूं की आपूर्ति को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
चावल के निर्यात में वृद्धि
भारत ने पिछले कुछ महीनों में चावल निर्यात पर लगाए गए अधिकांश प्रतिबंध हटा दिए हैं, जिससे चावल के निर्यात में तेजी आई है। इस वृद्धि का लाभ भारत को मिलने की संभावना है, क्योंकि देश दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है। चावल का भंडारण इतना अधिक है कि सरकार इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने की योजना बना सकती है। इससे न केवल किसानों को फायदा होगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।
चावल और गेहूं के भंडारण की स्थिति का भविष्य
भारत के लिए यह स्थिति दोनों फसलों के भंडारण में असंतुलन को दूर करने का अवसर है। चावल के अधिक भंडारण से जहां निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, वहीं गेहूं की कमी को लेकर सरकार को रणनीति तैयार करनी होगी। गेहूं की बिक्री बढ़ाने से गेहूं के भंडारण को स्थिर किया जा सकता है। इसके अलावा, सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि रबी फसल के दौरान गेहूं का भंडारण संतुलित रहे, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की आपूर्ति समस्या न हो।
सरकार की नीति और कदम
भारत सरकार ने गेहूं के भंडारण को लेकर कुछ नई नीतियां बनाई हैं। सरकार का उद्देश्य है कि गेहूं का भंडारण संतुलित रहे और कृषि मंत्रालय के द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार ही गेहूं की खरीद की जाए। इस नीति के तहत, सरकार गेहूं के भंडारण को बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर सकती है, ताकि भविष्य में गेहूं की कमी न हो।
चावल और गेहूं के भंडारण में असंतुलन भारत सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। चावल का भंडारण रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से निर्यात में वृद्धि हो सकती है, लेकिन गेहूं के भंडारण में कमी सरकार के लिए चिंता का कारण है। सरकार को इस असंतुलन को दूर करने के लिए नवीन नीतियां बनानी होंगी, ताकि गेहूं की आपूर्ति संतुलित बनी रहे। इसके अलावा, किसानों और व्यापारियों को इस स्थिति से निपटने के लिए समन्वय के साथ काम करना होगा।
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