मेघदूत एग्रो : sarso ka bhav- इन दिनों सरसों के दाम (Sarso Ka Bhav) ने किसानों और व्यापारियों दोनों को ही हैरान कर दिया है। हर मंडी में सरसों के भाव (Mustard Price) आसमान छू रहे हैं और यह उछाल किसी को भी चौंका सकता है। किसानों के चेहरे पर मुस्कान है तो वहीं तेल मिल मालिकों और व्यापारियों को इस बढ़ोतरी ने झटका दिया है। आखिर क्या वजह है कि सरसों के दाम इतने तेजी से बढ़ रहे हैं? आइए जानते हैं पूरी कहानी।
हरदा मंडी में सरसों का ताजा भाव
हरदा मंडी में सरसों का न्यूनतम भाव ₹4100 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है, जबकि अधिकतम भाव ₹5381 तक पहुंच गया है। मॉडल भाव ₹5212 पर टिका हुआ है। यहां सरसों के अलावा अन्य फसलों के भाव भी उछाल पर हैं।
फसल | न्यूनतम भाव (₹/क्विंटल) | अधिकतम भाव (₹/क्विंटल) | मॉडल भाव (₹/क्विंटल) |
---|---|---|---|
गेहूं | 2401 | 2779 | 2626 |
चना | 3800 | 5414 | 5133 |
सोयाबीन | 1400 | 3909 | 3790 |
मक्का | 1786 | 2170 | 2042 |
मंदसौर मंडी में सरसों का जलवा
मंदसौर मंडी में भी सरसों ने अपना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। यहां सरसों का न्यूनतम भाव ₹4701 और अधिकतम भाव ₹5576 प्रति क्विंटल रहा। मॉडल भाव ₹5150 पर स्थिर है।
फसल | न्यूनतम भाव (₹/क्विंटल) | अधिकतम भाव (₹/क्विंटल) | मॉडल भाव (₹/क्विंटल) |
---|---|---|---|
मक्का | 2180 | 2461 | 2320 |
उड़द | 4699 | 6000 | 5350 |
चना | 4570 | 5500 | 5050 |
लहसुन | 5000 | 8500 | 6750 |
इंदौर मंडी में सरसों का उछाल
इंदौर मंडी में सरसों के भाव ₹5215 से ₹5300 प्रति क्विंटल के बीच रहे। यहां अन्य फसलों के भाव भी बढ़े हुए हैं।
फसल | न्यूनतम भाव (₹/क्विंटल) | अधिकतम भाव (₹/क्विंटल) | मॉडल भाव (₹/क्विंटल) |
---|---|---|---|
सोयाबीन | 3400 | 3990 | 3850 |
गेहूं | 2750 | 3000 | 2811 |
डॉलर चना | 7000 | 9800 | 8600 |
तुअर | 5850 | 6815 | – |
क्यों बढ़ रहे हैं सरसों के दाम?
सरसों के दाम (Sarso Ka Bhav) में इस तेजी के पीछे कई कारण हैं:
- कम उत्पादन: इस साल कई इलाकों में सरसों की पैदावार (Production) कम हुई है, जिससे बाजार में सप्लाई (Supply) घट गई है।
- तेल कंपनियों की मांग: तेल कंपनियां (Oil Companies) ज्यादा स्टॉक खरीद रही हैं, जिससे दाम बढ़ रहे हैं।
- एक्सपोर्ट का असर: सरसों तेल (Mustard Oil) की डिमांड बढ़ने और निर्यात (Export) होने से भी दाम प्रभावित हुए हैं।
- मौसम का खेल: ज्यादा बारिश और बदलते मौसम ने भी उत्पादन को प्रभावित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरसों की सप्लाई (Supply) में सुधार नहीं होता है तो दाम और बढ़ सकते हैं। किसानों को इसका फायदा मिल रहा है, लेकिन तेल मिल मालिकों और व्यापारियों को इस उछाल से नुकसान हो रहा है।
सरसों के भाव (Sarso Ka Bhav) में यह उछाल कब तक रहेगा, यह तो समय ही बताएगा। लेकिन अभी के लिए तो बाजार गरम है और सभी की नजरें सरसों पर टिकी हुई हैं।
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