1. News
  2. कृषि यंत्र और उपकरण
  3. खेती-बाड़ी में बदलाव की तैयारी: इसरो और नीति आयोग मिलकर बंजर भूमि को बनाएंगे हरा-भरा

खेती-बाड़ी में बदलाव की तैयारी: इसरो और नीति आयोग मिलकर बंजर भूमि को बनाएंगे हरा-भरा

Wasteland restoration plan
Wasteland restoration plan

नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और नीति आयोग ने देश की बंजर भूमि को हरियाली में बदलने के लिए एक अनोखी योजना बनाई है। इसके तहत सैटेलाइट डाटा और कृषि वानिकी (Agroforestry) के जरिए वन क्षेत्र में सुधार और परती भूमि का पुनरुद्धार किया जाएगा। यह योजना पर्यावरण संरक्षण और खेती-बाड़ी को नई दिशा देने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी।

क्या है इसरो-नीति आयोग का प्लान?

इसरो के जियोपोर्टल भुवन पर उपलब्ध सैटेलाइट डाटा का उपयोग करते हुए कृषि वानिकी उपयुक्तता सूचकांक (Agroforestry Suitability Index) तैयार किया जा रहा है। इसके तहत निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा:

  1. बंजर भूमि का विश्लेषण:
    भूमि उपयोग, भूमि कवर, जल निकाय और मृदा कार्बनिक पदार्थ जैसे भू-स्थानिक आंकड़ों को एकत्रित कर उपयोगी बनाया जाएगा।
  2. सटीक आंकड़े:
    यह सूचकांक बताएगा कि किन क्षेत्रों में कृषि वानिकी के माध्यम से अधिकतम लाभ उठाया जा सकता है।
  3. राज्य और जिला स्तर पर डेटा:
    भुवन पोर्टल के जरिए राज्य और जिला स्तर पर कृषि वानिकी से संबंधित आंकड़े सबके लिए उपलब्ध होंगे।

किन राज्यों को मिलेगा सबसे अधिक फायदा?

शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और तेलंगाना कृषि वानिकी उपयुक्तता के लिए सबसे बड़े राज्यों के रूप में उभरे हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर और नागालैंड जैसे मध्यम आकार के राज्यों में भी इस योजना की बड़ी संभावनाएं हैं।

राज्य उपयुक्तता स्तर (%)
राजस्थान 6.18%
मध्य प्रदेश 5.91%
तेलंगाना 5.75%

नीति आयोग की पहल: ग्रो पोर्टल

नीति आयोग ने 12 फरवरी को भुवन-आधारित ग्रीनिंग एंड रेस्टोरेशन ऑफ वेस्टलैंड विद एग्रोफॉरेस्ट्री (GRRO) पोर्टल लॉन्च किया। इस पोर्टल का उद्देश्य:

  • परती भूमि को हरा-भरा बनाना।
  • कृषि वानिकी के जरिए जलवायु परिवर्तन से निपटना।
  • भूमि उपयोग को अधिकतम करना।

इस पोर्टल का उपयोग कृषि व्यवसायियों, स्टार्टअप्स, गैर-सरकारी संस्थाओं और शोधकर्ताओं द्वारा किया जा सकता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने बताया कि, “कृषि वानिकी से भारत को लकड़ी के उत्पादों के आयात में कमी, कार्बन पृथक्करण के जरिए जलवायु परिवर्तन का समाधान और इष्टतम भूमि उपयोग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।”

खेती-बाड़ी को नई दिशा

यह योजना देश के किसानों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। कृषि वानिकी से:

  • बंजर भूमि को उत्पादक बनाया जा सकेगा।
  • किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे।
  • पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।

इसरो के आंकड़ों पर एक नजर

  • भारत की लगभग 6.18% भूमि कृषि वानिकी के लिए अत्यधिक उपयुक्त है।
  • 4.91% भूमि मध्यम रूप से उपयुक्त है।
  • राजस्थान, मध्य प्रदेश, और तेलंगाना इस पहल के सबसे बड़े लाभार्थी बन सकते हैं।

इसरो और नीति आयोग की इस योजना से देश की परती और बंजर भूमि हरी-भरी बन सकेगी। इससे न केवल पर्यावरण को फायदा होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका को भी मजबूत किया जा सकेगा।

खेती-बाड़ी में बदलाव की तैयारी: इसरो और नीति आयोग मिलकर बंजर भूमि को बनाएंगे हरा-भरा

Comments are closed