चना (ग्राम) भारत की प्रमुख दलहनी फसलों में से एक है, जिसे “दलहनी फसलों का राजा” भी कहा जाता है। खासकर जल संकट वाले क्षेत्रों जैसे बुंदेलखंड में चने की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसकी कुछ वैरायटी कम पानी, कम संसाधन में भी बेहतरीन उत्पादन देती हैं। आज हम आपको चना की ऐसी ही टॉप 5 वैरायटी के बारे में जानकारी देंगे, जो किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं।
चना की टॉप 5 वैरायटी
वैरायटी का नाम | विशेषताएँ | उत्पादन क्षमता (प्रति हेक्टेयर) |
---|---|---|
JG 24 | कम पानी में अनुकूल, बुंदेलखंड के लिए उपयुक्त। | 7-8 क्विंटल |
JG 36 | रोग प्रतिरोधक, उच्च गुणवत्ता। | 8-9 क्विंटल |
पूसा मानव | उच्च उत्पादकता, राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध। | 10-12 क्विंटल |
JG 16 | जलवायु परिवर्तन अनुकूल, रेतीली मिट्टी में प्रभावी। | 8-10 क्विंटल |
JG 62 | सीमित पोषण और पानी में बेहतरीन उत्पादन। | 6-7 क्विंटल |
उत्पादन बढ़ाने के विशेष सुझाव
किसान अगर चने की खेती से अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं तो निम्नलिखित उपाय अपनाएं:
1. बीज उपचार
- चने के बीज को ट्राईकोडरमा जैसे फफूंदनाशक से उपचारित करें।
- प्रति किलो बीज पर 15 ग्राम ट्राईकोडरमा का उपयोग करें।
2. मिट्टी का चयन और उर्वरक
- चने की खेती के लिए दोमट या रेतीली मिट्टी सबसे बेहतर है।
- मिट्टी का pH स्तर 6.0-7.5 होना चाहिए।
- उर्वरक: प्रति हेक्टेयर 20-22 किलोग्राम नाइट्रोजन और 40-45 किलोग्राम फॉस्फोरस का उपयोग करें।
3. सिंचाई और फसल देखभाल
- चने की फसल को कम पानी की जरूरत होती है।
- सिंचाई का समय:
- बुवाई के बाद।
- फूल आने के समय।
- फसल की नियमित निगरानी करें और खरपतवारों को हटाएं।
चना का महत्व और उपयोग
चना न केवल किसानों के लिए फायदेमंद है, बल्कि इसका उपयोग कई उद्योगों में होता है:
- खाद्य उत्पाद: बेसन, सत्तू, नमकीन, मिठाई।
- दाल: प्रोटीन का प्रमुख स्रोत।
- भाजी: पशु चारे के रूप में उपयोग।
विशेषज्ञ की राय
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, चने की टॉप वैरायटी जैसे JG 24, JG 36, और पूसा मानव किसानों के लिए सबसे बेहतर हैं। सागर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. के.एस. यादव बताते हैं कि ये वैरायटी बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं, जहां जल संकट बना रहता है।
ग्वालियर विश्वविद्यालय द्वारा विकसित RBJ 201, 202, और 203 वैरायटी भी कम पानी में अधिक उत्पादन देती हैं।
चना की खेती क्यों है फायदेमंद?
चना किसानों के लिए न केवल लाभकारी फसल है, बल्कि यह मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती है। दलहनी फसल होने के कारण यह नाइट्रोजन को मिट्टी में संचित करती है, जिससे अगली फसल को लाभ होता है।
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