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गेहूं की बिजाई के बाद इस दवा का करें छिड़काव, नहीं तंग करेंगे खरपतवार

Wheat Cultivation Spray
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नई दिल्ली: अगर आप गेहूं की खेती करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। गेहूं की बुवाई के समय और इसके बाद खरपतवार नियंत्रण करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। सही तकनीक और सटीक उपाय अपनाने से आप न केवल खरपतवार को नियंत्रित कर सकते हैं, बल्कि अपनी फसल का उत्पादन 20-30% तक बढ़ा सकते हैं।

इस लेख में हम आपको गेहूं की खेती के दौरान खरपतवार नियंत्रण के आसान और सस्ते उपाय बता रहे हैं, जो किसानों के लिए वरदान साबित हो सकते हैं।


खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के समय ध्यान रखने योग्य बातें

खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

उपाय लाभ
बीज रहित खरपतवार का चयन करें। गेहूं के पौधे को प्रतिस्पर्धा से बचाएं।
लाइनों के बीच 18 सेमी की दूरी रखें। पौधों को पर्याप्त पोषण और प्रकाश मिलेगा।
खाद को बीज से 2-3 सेमी नीचे डालें। पौधों की जड़ें जल्दी मजबूत होंगी।
आड़ी-तिरछी बुवाई करें। गेहूं के पौधों की संख्या बढ़ेगी।
जल्दी पानी लगाकर खरपतवार को बढ़ने दें और फिर दवा का छिड़काव करें। शुरुआती खरपतवार को खत्म किया जा सकेगा।
मेढ़ और पानी की नालियों को साफ रखें। पानी का बहाव सही रहेगा और खरपतवार नहीं पनपेंगे।

बुवाई के बाद खरपतवार नियंत्रण के टिप्स

बुवाई के बाद खरपतवार पौधों के साथ पोषण, पानी और प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इसका असर पौधों की बढ़त और उत्पादन पर पड़ता है। इसलिए निम्नलिखित उपाय अपनाएं:

  • पायरोक्सासल्फोन 85% डब्ल्यूजी (Pyroxasulfone 85% WG) का इस्तेमाल करें।
    • खुराक: बुवाई के 72 घंटे के भीतर 60 ग्राम पायरोक्सासल्फोन को 250 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
    • यह खरपतवार को उगने से रोकता है और अगर उगते भी हैं तो सिंचाई के दौरान मुरझा जाते हैं।
  • संकरी पत्तियों वाले खरपतवारों के लिए मेटसल्फ़्यूरॉन मिथाइल का इस्तेमाल करें।
  • चौड़ी पत्तियों वाले खरपतवारों के लिए 2-4 डी सोडियम लवण का उपयोग करें।

खरपतवार नियंत्रित करने के फायदे

खरपतवार को नियंत्रित करने से गेहूं की खेती में निम्नलिखित फायदे मिलते हैं:

  1. उत्पादन में वृद्धि: खरपतवार से मुक्त खेत में गेहूं की फसल का उत्पादन 20-30% तक बढ़ सकता है।
  2. पौधों की गुणवत्ता में सुधार: पौधों को पर्याप्त पोषण, प्रकाश और पानी मिलता है।
  3. कम लागत: खरपतवार नियंत्रण के लिए सही तकनीकों का उपयोग करने से लागत कम आती है।

कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि गेहूं की खेती में खरपतवार नियंत्रण के लिए सबसे जरूरी है सही समय पर दवा का छिड़काव और खेत की सफाई। उन्होंने यह भी सलाह दी है कि खेत में 3 साल में कम से कम एक बार बरसीम या जई जैसी चारे की फसल उगाएं। इससे खेत की मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और खरपतवार को भी नियंत्रित किया जा सकता है।


महत्वपूर्ण बातें संक्षेप में

क्र.सं. कार्य समय
1 खरपतवार रहित बीजों का चयन बुवाई से पहले
2 पायरोक्सासल्फोन का छिड़काव बुवाई के 72 घंटे के भीतर
3 खेत की सफाई नियमित रूप से
4 मेढ़ और नालियों की सफाई हर मौसम में

निष्कर्ष

खरपतवार नियंत्रण गेहूं की खेती का एक अहम हिस्सा है। बुवाई से लेकर फसल कटाई तक, सही उपाय अपनाने से न केवल फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है, बल्कि किसानों की आय भी बढ़ती है। यदि आप भी अपनी फसल को बेहतर बनाना चाहते हैं तो ऊपर बताए गए उपायों को अपनाएं और एक शानदार फसल का आनंद लें।

गेहूं की बिजाई के बाद इस दवा का करें छिड़काव, नहीं तंग करेंगे खरपतवार

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