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कृषि विभाग की सलाह: गेहूं की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए समय पर उठाएं कदम

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लखनऊ: गेहूं की फसल के लिए इस समय सबसे बड़ा खतरा खरपतवार है। ये खरपतवार फसल के पोषक तत्वों को चुराकर उसे कमजोर कर देते हैं, जिससे गेहूं की पैदावार पर सीधा असर पड़ता है। इसके चलते किसान काफी नुकसान उठाते हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है, जिसमें खरपतवार नियंत्रण के लिए जरूरी कदम बताए गए हैं।


गेहूं की फसल में खरपतवारों का असर

खरपतवारों का समय पर नियंत्रण न होने पर वे फसल की वृद्धि में बाधा डालते हैं। इससे गेहूं की फसल को पोषण की कमी होती है, और उसकी गुणवत्ता में भी गिरावट आती है। इसके परिणामस्वरूप, किसानों की फसल कमज़ोर होती है और उत्पादन में भारी कमी आ सकती है।

गेहूं की फसल को प्रभावित करने वाले प्रमुख खरपतवारों में शामिल हैं:

  • गेहूं का मामा
  • कृष्णनील
  • मोथा
  • बथुआ
  • चटरी-मटरी
  • हिरनखुरी
  • सैंजी
  • अंकरी
  • अंकरा
  • जंगली जई
  • जंगली पालक
  • जंगली गाजर

इन खरपतवारों का नियंत्रण हर किसान के लिए आवश्यक है, ताकि फसल को अच्छे पोषण मिल सके और उत्पादन में वृद्धि हो सके।


खरपतवार नियंत्रण के प्रभावी उपाय

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग द्वारा सुझाए गए कुछ महत्वपूर्ण खरपतवार नियंत्रण उपाय इस प्रकार हैं:

1. सल्फोसल्फ्यूरान और मेटसल्फ्यूरॉन का उपयोग

  • गेहूं की बुवाई के 30 से 35 दिन बाद सल्फोसल्फ्यूरान (16 ग्राम प्रति एकड़) के साथ मेटसल्फ्यूरॉन (टोटल) का छिड़काव करें।
  • इसे 120 से 150 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
  • यह उपाय उन खेतों के लिए है जहां चौड़ी पत्तियों वाले खरपतवार की अधिकता हो।

2. मकोए पर नियंत्रण के लिए विशेष छिड़काव

  • यदि खेतों में मकोए की अधिकता हो तो सल्फोसल्फ्यूरान (13.3 ग्राम प्रति एकड़) और कारफेंट्राजोन (20 ग्राम प्रति एकड़) का मिश्रण 120 से 150 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
  • यह छिड़काव गेहूं की बुवाई के 30 दिन बाद करें।

3. खरपतवारनाशी का छिड़काव उपकरण

  • खरपतवारनाशी का छिड़काव करते समय फ्लैटफैन नॉजिल और बूम नॉजिल का प्रयोग करें। ये नॉजिल खरपतवारनाशी का समुचित छिड़काव सुनिश्चित करते हैं।

खरपतवारनाशी छिड़काव के फायदे

  1. गेहूं की गुणवत्ता में सुधार: समय पर खरपतवार नियंत्रण से गेहूं की फसल को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे उसकी गुणवत्ता और पैदावार में वृद्धि होती है।
  2. बढ़ता हुआ उत्पादन: खरपतवारनाशी के छिड़काव से गेहूं की फसल में रोग और कीटों की समस्या कम होती है, जिससे उत्पादन में सुधार होता है।
  3. कम लागत में अधिक फायदा: खरपतवार नियंत्रण के उचित उपायों से किसानों को अतिरिक्त लागत का सामना नहीं करना पड़ता, और यह उपाय बेहद प्रभावी होते हैं।

खरपतवार नियंत्रण के लिए जरूरी सावधानियाँ

  1. सही मात्रा का प्रयोग करें: खेत में खरपतवारनाशी का छिड़काव करते समय सही मात्रा का ध्यान रखें। अधिक मात्रा फसल को नुकसान पहुंचा सकती है।
  2. नमी का ध्यान रखें: छिड़काव के दौरान खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए ताकि खरपतवारनाशी अच्छे से असर करें।
  3. समान रूप से छिड़काव करें: छिड़काव का उपकरण सही से काम कर रहा हो और पानी समान रूप से खेतों में पहुंचे, इसका ध्यान रखें।

खरपतवार नियंत्रण के अन्य उपाय

इसके अलावा, कुछ प्राकृतिक उपाय भी किसानों को खरपतवार नियंत्रण में मदद कर सकते हैं:

  • नमीयुक्त मिट्टी: खरपतवारों की बढ़त को रोकने के लिए खेत की मिट्टी को नम रखना आवश्यक है।
  • घास का अधिक प्रयोग: कुछ विशेष घास की प्रजातियाँ खरपतवारों के विकास को रोक सकती हैं, जिन्हें किसानों को अपनाना चाहिए।

खरपतवार नियंत्रण से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु

खरपतवार नियंत्रण उपाय उपयुक्त समय उपकरण / मिश्रण
सल्फोसल्फ्यूरान और मेटसल्फ्यूरॉन गेहूं की बुवाई के 30-35 दिन बाद 16 ग्राम सल्फोसल्फ्यूरान, मेटसल्फ्यूरॉन (टोटल)
मकोए पर नियंत्रण गेहूं की बुवाई के 30 दिन बाद सल्फोसल्फ्यूरान (13.3 ग्राम), कारफेंट्राजोन (20 ग्राम)
छिड़काव उपकरण सभी प्रकार के खरपतवार के लिए फ्लैटफैन नॉजिल, बूम नॉजिल

किसानों के लिए सिफारिशें और संदेश

खरपतवारों का समय पर नियंत्रण गेहूं की फसल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए बेहद आवश्यक है। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के निर्देशों का पालन करके किसान अपनी फसल को बेहतर बना सकते हैं और नुकसान से बच सकते हैं। किसान जितनी जल्दी इन उपायों को अपनाएंगे, उतनी ही जल्दी उनका लाभ मिलेगा।

नोट: हमेशा मौसम की स्थिति और खेत की विशेष आवश्यकताओं के आधार पर ही उपायों को अपनाएं।

कृषि विभाग की सलाह: गेहूं की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए समय पर उठाएं कदम

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