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गेहूं की बुवाई के समय DAP की कमी, वैकल्पिक खाद से बचा सकते हैं उत्पादन

Wheat farming alternatives for DAP

नई दिल्ली। रबी सीजन की शुरुआत हो चुकी है, और किसान अपनी गेहूं की फसल की बुवाई में जुट गए हैं। लेकिन डीएपी (डाई-अमोनियम फास्फेट) खाद की कमी ने किसानों को परेशान कर दिया है। देशभर में डीएपी की मांग को देखते हुए इसकी उपलब्धता चुनौती बन चुकी है। समय पर बुवाई न होने से उत्पादन पर असर पड़ सकता है। ऐसे में पूसा के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को डीएपी के विकल्प सुझाए हैं, ताकि उत्पादन में किसी तरह की बाधा न आए।


डीएपी में क्या होता है खास?

डीएपी उर्वरक में 46% फास्फोरस और 18% नाइट्रोजन होता है। यह फसल की शुरुआती वृद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। गेहूं की बुवाई में डीएपी का उपयोग सबसे अधिक होता है। लेकिन यदि यह उपलब्ध न हो, तो कुछ वैकल्पिक खादों का प्रयोग कर किसान अपनी फसल की गुणवत्ता बनाए रख सकते हैं।

खाद का नाम फास्फोरस (%) नाइट्रोजन (%) सल्फर (%) उपयोग की मात्रा
डीएपी (DAP) 46% 18% 125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
एनपीके (12:32:16) 32% 12% 16% 188 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
एसएसपी (SSP) 16% 12% 375 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर

डीएपी का विकल्प: एनपीके और एसएसपी उर्वरक

एनपीके (12:32:16): यह खाद डीएपी का सबसे अच्छा विकल्प है। इसमें फास्फोरस के साथ नाइट्रोजन और सल्फर भी उपलब्ध है। गेहूं और मक्का की फसलों के लिए 188 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर एनपीके का उपयोग किया जा सकता है।

सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी): डीएपी की कमी के समय एसएसपी भी उपयोगी है। इसमें 16% फास्फोरस, 12% सल्फर और 19% कैल्शियम होता है। दलहन और तिलहन फसलों के लिए यह खाद बेहद फायदेमंद है। एसएसपी 375 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग किया जा सकता है।


विज्ञानियों की सलाह: गेहूं की बुवाई में करें ये उपाय

पूसा के वैज्ञानिक डॉ. राजबीर यादव के अनुसार, किसानों को डीएपी की कमी के समय घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि किसान अपनी मिट्टी की जांच कराएं और जरूरत के अनुसार उर्वरकों का चयन करें।

उन्नत बीजों का चयन:
गेहूं की फसल के लिए एचडी 3385, एचडी 2967, डीबीडब्लू 370, डीबीडब्लू 371 जैसे उन्नत किस्म के बीजों का चयन करें। प्रति हेक्टेयर 100 किलोग्राम बीज का उपयोग करें।

मृदा स्वास्थ्य का ध्यान:
जिन खेतों में दीमक का प्रकोप हो, वहां क्लोरपाईरिफॉस 20 ईसी को 5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से पलेवा के साथ मिलाएं। इससे फसल सुरक्षित रहेगी।

खाद की संतुलित मात्रा:

  • नाइट्रोजन: 150 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
  • फास्फोरस: 60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
  • पोटाश: 40 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर

डीएपी के विकल्पों के लाभ

  1. फसल उत्पादकता में सुधार: एनपीके और एसएसपी जैसे उर्वरकों के उपयोग से फसल की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं आती।
  2. मृदा स्वास्थ्य: एसएसपी का उपयोग मृदा का पीएच संतुलित रखता है और इसमें मौजूद कैल्शियम व सल्फर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं।
  3. सुलभता: इन विकल्पों की उपलब्धता बाजार में डीएपी की तुलना में बेहतर है।

कृषि वैज्ञानिकों की अपील

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान जल्दबाजी में किसी एक खाद पर निर्भर न रहें। मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार उर्वरकों का चयन करें और समय पर बुवाई पूरी करें। सही खाद और बीज के इस्तेमाल से फसल की उत्पादकता को बनाए रखा जा सकता है।


निष्कर्ष

डीएपी खाद की कमी के बावजूद किसान एनपीके और एसएसपी जैसे विकल्पों का उपयोग कर अपनी फसल की उत्पादकता को सुरक्षित रख सकते हैं। वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार उर्वरकों का चयन और सही मात्रा का उपयोग, उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगा।

गेहूं की बुवाई के समय DAP की कमी, वैकल्पिक खाद से बचा सकते हैं उत्पादन

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