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गेहूं की बुवाई में तेजी: एमएसपी बढ़ने के बाद किसानों में उत्साह, जानिए कब और कितनी करनी चाहिए सिंचाई

Wheat irrigation management
Wheat irrigation management

नई दिल्ली। देशभर में रबी सीजन के दौरान गेहूं की बुवाई तेजी पकड़ रही है। सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में ₹150 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी के बाद किसानों में उत्साह देखा जा रहा है। कुछ क्षेत्रों में तो गेहूं के बीज अंकुरित होने भी लगे हैं। इस बीच, उत्तर प्रदेश कृषि विभाग और विशेषज्ञों ने गेहूं की फसल में उचित सिंचाई के महत्व पर जोर देते हुए किसानों को सही समय और मात्रा में पानी देने की सलाह दी है।


केंद्र का गेहूं उत्पादन लक्ष्य

केंद्र सरकार ने 2024-25 के लिए खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य 3415.5 लाख टन तय किया है, जिसमें 1150 लाख टन का लक्ष्य केवल गेहूं उत्पादन के लिए रखा गया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल अनुकूल मौसम और किसानों की मेहनत से यह लक्ष्य पार होने की संभावना है।

वर्ष खाद्यान्न लक्ष्य (लाख टन) गेहूं लक्ष्य (लाख टन)
2023-24 3340 1125
2024-25 (लक्ष्य) 3415.5 1150

गेहूं की फसल में सिंचाई प्रबंधन

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, सही समय पर सिंचाई से गेहूं की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने किसानों के लिए सिंचाई का चरणबद्ध कार्यक्रम जारी किया है।

छह सिंचाई वाली विधि

  1. पहली सिंचाई: बुवाई के 20-25 दिन बाद, ताजमूल अवस्था में।
  2. दूसरी सिंचाई: 40-50 दिन बाद, कल्ले निकलने के समय।
  3. तीसरी सिंचाई: 60-65 दिन बाद, गांठ बनने के समय।
  4. चौथी सिंचाई: 80-85 दिन बाद, पौधे में फूल बनने के समय।
  5. पांचवीं सिंचाई: 100-105 दिन बाद, बाली में दाना बनने के समय।
  6. छठी सिंचाई: 115-120 दिन बाद, दाना भरने के समय।

तीन सिंचाई वाली विधि

कुछ इलाकों में पानी की सीमित उपलब्धता वाले किसानों के लिए तीन सिंचाई पर्याप्त होती है:

  1. बुवाई के 20-25 दिन बाद।
  2. बाली निकलने से पहले, 80 दिन बाद।
  3. दाना भरने के समय, 115 दिन बाद।

पानी भराव का ध्यान रखें किसान

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेत में पानी का स्तर नियंत्रित रखने की सलाह दी है। अधिक पानी से पौधे की जड़ों को नुकसान हो सकता है। दिसंबर और जनवरी में ठंड और कोहरे की वजह से खेतों में अधिक नमी रहेगी, जो गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।


मौसम का गेहूं उत्पादन पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल शीत लहर और कोहरे का असर ज्यादा रहेगा। खरीफ सीजन में हुई अच्छी बारिश के कारण खेतों में नमी बनी हुई है। ठंड और कोहरे के ये हालात गेहूं की फसल के लिए अनुकूल माने जाते हैं।


एमएसपी में बढ़ोतरी से किसानों को राहत

इस साल गेहूं की एमएसपी ₹150 प्रति क्विंटल बढ़ाकर ₹2,275 कर दी गई है। इससे किसानों को उत्पादन लागत निकालने और मुनाफा बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह कदम सरकार के फसल उत्पादकता और किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयासों को भी बल देता है।


गेहूं उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सुझाव

  1. उन्नत किस्मों का चयन करें।
  2. मिट्टी की जांच करवाएं और संतुलित उर्वरक उपयोग करें।
  3. फसल में समय पर रोग और कीट नियंत्रण करें।

कृषि क्षेत्र में इस साल गेहूं उत्पादन को लेकर उम्मीदें अधिक हैं। किसानों की मेहनत और सही तकनीकों के इस्तेमाल से न केवल फसल का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि उनकी आय में भी सुधार होगा।

गेहूं की बुवाई में तेजी: एमएसपी बढ़ने के बाद किसानों में उत्साह, जानिए कब और कितनी करनी चाहिए सिंचाई

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